Mr. Ram Pyare Singh
Shastri
M.A. (Hindi-Sanskrit), B.Ed.,
PGD. Rural Development, CIG. (Guidance).
Contact No. 9247352663
E.mail: rps61_3@yahoo.in
‘ग्राम
विकासेन राष्ट्रविकासं सम्भवमस्ति।‘ गाँवों के विकास से ही राष्ट्र का
विकास संभव है।
भारत गाँवों का देश है। यहाँ की 75प्रतिशत
जनता गाँवों में रहती है। शहरों के
अधिकांश लोग गाँवों से ही जुड़े रहते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार
कृषि है। कृषि मानसून पर निर्भर करती है- कहीं सूखा तो कहीं बाढ़। दोनों ही
स्थितियों में कृषि उपज का काफी नुकसान होता है। परिणाम स्वरूप अन्न पैदा करने
वाले किसान खुद भूखमरी के शिकार हो जाते हैं। कृषि के लिए लिये गए कर्ज़ को वे
भुगतान नहीं कर पाते हैं।ऐसी स्थिति में अधिकांश किसानों के सामने आत्महत्या करने
के अलावा और कोई दूसरा रास्ता शेष नहीं रहता है। कृषि उत्पाद में कमी के कारण
शहरों में भी महँगाई बढ़ जाती है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकारें कोई ठोस,
स्थाई और कारगर योजनाएं नहीं बनाती हैं । प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये पानी में बहा
दिए जाते हैं। नदियों से नहरें निकाल कर बाढ़ वाले इलाकों का पानी सूखाग्रस्त
इलाकों में छोड़ कर बाढ़ और सूखा दोनों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह कार्य
केन्द्र सरकार के द्वारा ही किया
जाना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं जैसे शिक्षा, चिकित्सा, यातायात (परिवहन)
इत्यादि का अभाव होता है। प्रायः देखा जाता है कि जिन- जिन गाँवों से होकर पक्की
सड़कें शहरों को जाती है, उन गाँवों का विकास जिन गाँवों से होकर सड़कें और रेलवे
नहीं जाती है की तुलना में काफी तेज़ी से हुआ है, क्योंकि
रेलवे और पक्की सड़कें गाँवों के करीब होने से
ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे सुबह अपने गाँव से दूर शहर जाकर अपनी पढ़ाई करके शाम
को अपने घर वापस आ जाते हैं,उन्हें शहर में रहने की जरूरत नहीं पड़ती। गाँव के लोग
अपने परिवार के बीमार सदस्यों का इलाज़ शहर के अच्छे डॉक्टरों से कराकर बस या
ट्रेन से अपने घर वापस आ जाते हैं। ग्रामीण लोग शहर से अच्छे खाद-बीज लाकर अपनी
कृषि की उपज़ को बढ़ाते हैं तथा अपनी कृषि उपज़ अनाज़,शाक-सब्जियाँ,फल इत्यादि शहर
की मंडियों में ले जाकर अच्छे दामों में बेंचकर शाम को अपने गाँव वापस आ जाते हैं।
वहीं जिन गाँवों से होकर पक्की सड़कें या रेल्वे नहीं जाती हैं वे गाँव इन सब
सुविधाओं से वंचित रहते हैं । वे गाँव आज भी अविकसित हैं। ऐसे ही गाँवों के विकास
हेतु ‘अमर भारती ग्राम विकास संस्था’ की
स्थापना की गई है जिसका उद्देश्य हैः-ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के
प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालय, महाविद्यालय,गुरूकुल,
अनाथाश्रम, महिला विद्यापीठों की स्थापना
करना,जैविकीय कृषि और कृषि में नई तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देना,कुटीर एवं गृह उद्योगों को बढ़ावा देना, ग्रामीण महिलाओं को
सबल बनाना, ग्रामीण लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान
कराना ताकि कोई उनका शोषण न कर सके,ग्रामीण भागों में आयुर्वेद, योग एवं भारतीय
चिकित्सा पद्धतियों का प्रचार-प्रसार करना इत्यादि जिससे ग्रामीण लोगों का जीवन
स्तर ऊँचा उठ सके और गाँवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन को कम किया जा सके।
‘गाँवों के विकास से ही राष्ट्र का विकास
सम्भव है।‘ लेकिन ‘अकेला चना
भाड़ नहीं फोड़ता।‘ इस
उद्देश्य की पूर्ति हेतु सरकारी अनुदान,दाताओं द्वारा दान की एवं सेवाभावी लोगों के बहुमूल्य
सहयोग की आवश्यकता है। उदार दातागण अपने दान को संस्था के नाम चेक या नकद संस्था
के बैंक खाते में भुगतान करके कर सकते हैं। आर्थिक रूप से समृद्ध सेवाभावी लोग अपने-अपने क्षेत्र में
संस्था की शाखा खोलकर संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य कर सकते हैं। संस्था
का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण ग्रामीण भारत है।
संस्था की एक शाखा उ०प्र० के देवरिया
जनपद के मसजिदिया गाँव (बिहार की सीमा पर) में खोला गया है जहाँ पर एक ग्रामीण महिला विद्यापीठ खोलने का प्रस्ताव रखा गया है।

